नई दिल्ली ।
भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System - IKS) के माध्यम से समग्र विकास पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘ज्ञान सभा 2026’ का उद्घाटन शुक्रवार, 24 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) दिल्ली में किया गया। उद्घाटन समारोह में देशभर से आए शिक्षाविदों, शैक्षणिक प्रशासकों और वैचारिक नेतृत्व से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों ने भाग लिया ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. कृष्ण गोपाल, सह सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) रहे। उनके साथ शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (SSUN) के राष्ट्रीय सचिव श्री अतुल कोठारी, SSUN की अध्यक्षा प्रो. पंकज मित्तल, NIT दिल्ली के निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय के. शर्मा, कुलसचिव प्रो. (डॉ.) हितेश शर्मा सहित कई गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही ।
दीप प्रज्वलन के साथ हुई शुरुआत
उद्घाटन समारोह की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुई, जिसे ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक बताया गया। कार्यक्रम समन्वयक प्रो. हितेंद्र त्यागी के आमंत्रण पर कुलसचिव प्रो. हितेश शर्मा ने अतिथियों का परिचय कराया। इस अवसर पर सभी गणमान्य व्यक्तियों को शॉल, पौधा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया ।
NIT दिल्ली की यात्रा और समग्र शिक्षा पर जोर
NIT दिल्ली के निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय के. शर्मा ने अपने संबोधन में संस्थान की 2010 से अब तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए शिक्षा, अनुसंधान और खेलों में मिली उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व और मूल्य निर्माण का भी माध्यम है ।
IKS केवल शिक्षा नहीं, जीवन दृष्टि
SSUN के उत्तर और पश्चिम क्षेत्र संयोजक श्री जगाराम ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को सनातन परंपरा से जुड़ी जीवन दृष्टि बताया। उन्होंने कहा कि IKS का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा का संतुलित विकास है। उन्होंने पृथ्वी को “संसाधन” नहीं बल्कि “माता” के रूप में देखने की भारतीय अवधारणा पर विशेष बल दिया ।
शिक्षा में भारतीय मूल्यों की वापसी जरूरी
SSUN के राष्ट्रीय सचिव श्री अतुल कोठारी ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में चरित्र निर्माण और स्वदेशी मूल्यों के समावेश की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने शैक्षिक पुस्तकों में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तथ्यों की कमी को चिंता का विषय बताया और विदेशी शैक्षिक मॉडलों के अंधानुकरण से बचने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में ‘ज्ञान सभा’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से IKS को बढ़ावा दिया जा रहा है ।
पाठ्यक्रम, शोध और छात्र सहभागिता पर फोकस
SSUN की अध्यक्षा प्रो. पंकज मित्तल ने आगामी दो दिनों के कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालयों के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए। इनमें पाठ्यक्रम में IKS का समावेश, संकाय विकास, वैदिक ग्रंथों पर शोध, संस्थागत सहयोग, छात्र सहभागिता और वित्तीय समर्थन जैसे बिंदु शामिल हैं। इस अवसर पर ज्ञान सभा पर आधारित एक द्विभाषी (हिंदी-अंग्रेज़ी) पुस्तिका का भी विमोचन किया गया ।
“राष्ट्र को समझे बिना शिक्षा अधूरी”
मुख्य अतिथि डॉ. कृष्ण गोपाल ने अपने संबोधन में कहा कि बीते एक हजार वर्षों में पश्चिमी प्रभाव के कारण भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को भारी क्षति पहुंची है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को समझना और भारत की विविधता में एकता की भावना को पहचानना, शिक्षा की सही दिशा तय करने के लिए आवश्यक है। औपनिवेशिक काल से पहले के भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्वदेशी ज्ञान की ओर लौटने का आह्वान किया ।
धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ समापन
कार्यक्रम का समापन कुलसचिव प्रो. (डॉ.) हितेश शर्मा के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ। ज्ञान सभा 2026 का दूसरा दिन समकालीन शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली के एकीकरण पर केंद्रित सत्रों, कार्यशालाओं और विचार-विमर्श के लिए समर्पित रहेगा ।



