नई दिल्ली। पेपर लीक के मुद्दे को लेकर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर पार्थ गौतम ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान जिस तरह पुलिस ने छात्रों के साथ व्यवहार किया, वह उचित नहीं था। उन्होंने छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की निंदा करते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पार्थ गौतम ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग, जिनमें कुणाल कामरा और नंदिता नारायण जैसे नाम शामिल हैं, कथित तौर पर छात्रों को मूल मुद्दे से भटकाने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अन्य लोग भी प्रदर्शन के दौरान अपने राजनीतिक हित साधने और मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रदर्शन को मूल मुद्दे से भटकाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन छात्रों के खिलाफ इस तरह की पुलिस कार्रवाई उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि संसद के आसपास जिस तरह पुलिसकर्मी हथियारों के साथ तैनात नजर आए और प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, वह चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए।
पार्थ गौतम ने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने आंदोलन को केवल पेपर लीक के मुद्दे तक सीमित रखें। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस मुद्दे से अलग किसी अन्य विषय को प्रदर्शन में लाने का प्रयास करता है तो छात्रों को उसका विरोध करना चाहिए और अपने मूल मुद्दे पर ही ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।
उन्होंने भारत सरकार से भी अपील की कि पेपर लीक से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले 22 बच्चों के परिवारों से प्रधानमंत्री मुलाकात करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें सांत्वना देनी चाहिए और यह भरोसा दिलाना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
अंत में पार्थ गौतम ने छात्रों से कहा कि यदि उनका आंदोलन पेपर लीक के मुद्दे तक सीमित रहता है तो वह उनके साथ हैं। उन्होंने छात्रों से अपने मुद्दे पर डटे रहने की अपील की।
