नई दिल्ली, 21 अप्रैल 2026
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, दिल्ली ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों की मूलभूत समस्याओं और अधिकारों को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में विशाल 'छात्र अधिकार मार्च' का आयोजन किया। इस विरोध प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों से आए हजारों छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। अभाविप ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष 12 प्रमुख मांगों का एक माँगपत्र रखा है, जो छात्रों के शैक्षणिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े सुधारों पर केंद्रित है।
परिषद की मुख्य मांगों में विश्वविद्यालय को 'पोर्टा केबिन' मुक्त बनाना, अनिवार्य फायर सेफ्टी ऑडिट सुनिश्चित करना और 30 अप्रैल 2026 तक परीक्षा फॉर्म की लेट फीस से छूट दिलाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, अभाविप ने पाँच वर्षीय लॉ BA LLB(H) की शुल्क को घटाने, अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा का आयोजन, नए हॉस्टलों का निर्माण और एक 'सेंट्रलाइज्ड प्लेसमेंट सेल' की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण मांग उठाई। सामाजिक समावेशिता को बढ़ावा देते हुए अभाविप ने थर्ड जेंडर छात्रों के लिए मुफ्त शिक्षा और विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे को दिव्यांग सुगम्य बनाने पर भी विशेष जोर दिया है।
अभाविप ने 'एक कोर्स , एक फीस' और अकादमिक काउंसिल में छात्रों के प्रतिनिधित्व की मांग करते हुए कॉलेज कैंटीन में स्वच्छता और भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने की भी पुरजोर अपील की है। छात्रों के इस भारी हुजूम और नारों की गूंज ने प्रशासन को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि छात्र अब अपनी अनदेखी और प्रशासनिक ढिलाई को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
अभाविप दिल्ली प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि आज का यह 'छात्र अधिकार मार्च' दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की उदासीनता के विरुद्ध छात्रों का एक निर्णायक शंखनाद है। अभाविप ने जिन 12 मांगों को उठाया है, वे छात्रों के भविष्य और उनकी सुरक्षा से जुड़ी हुई हैं। आज हमारे आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर यह मांग की कि यदि प्रशासन इन 12 मांगों पर तत्काल सकारात्मक कदम नहीं उठाता है, तो अभाविप छात्र हितों की रक्षा के लिए और भी उग्र आंदोलन करेगी। हम विश्वविद्यालय को पूरी तरह सुरक्षित, समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने के संकल्प से पीछे नहीं हटेंगे।
दिल्ली विश्वविद्यालय के कई छात्र नेता जैसे अपराजिता ठाकुर,मित्रविंदा कर्णवाल,यश डबास,आदि भी मौजूद रहे ।

